Wednesday, 20 July 2011

वक़्त गुजर जायेगा ..


ये  वक़्त  गुजर  जायेगा  एक  दिन ,
तू  देखता  रह  जायेगा ..

आज  खुश  है  तू  अपने  कर्मों  से ,
कल  शायद  इनसे  तू  रो  जायेगा ,
खुद  को  बचाले  बुरे  कर्मों  से ,
वरना  तू  मर  मर  के   जी  पायेगा .

बुलंदियों  पर  है  आज  तू ,
तो  क्या  कल  बुलंद  रह  पायेगा .
खुद  को  ही  आज  समझले  तू ,
वरना  फिर  संभल  न  पायेगा .

जब  गरीबी  तुझे  उदास  करे ,
या  बेशुमार  दौलत  तेरे  हाथ  भरे ,
मत  मुस्कुरा , न  निराश  हो ,
सब  कुछ  वेवफा  हो  जायेगा .

क्या  बनाकर  "ताज ", कारीगर  आज  जिन्दा  हैं ,
या  पिरामिड  की  मिटटी  कोई  अमृत  का  पुलिंदा  है ,
पिरामिड  हो  या  इंसान  हो ,
कोई  न  ठहर  पायेगा .

तेरे  दिल  की  तस्वीर  मुस्कराहट  से  बनेगी ,
तेरी  रात  मुस्कुराते  संगीत  से  सजेगी ,
खुद  को  इतना  व्यस्त  कर  लेना  तू ,
दुखी  होने  के  लिए  समय  खो  जायेगा .

ये  वक़्त  गुजर  जायेगा  एक  दिन ,
तू  देखता  रह  जायेगा ..

6 comments:

  1. Aryan Ji bahut sunder rachna. bahut gehri paith ker gayi hai aapki ye bhavook rachna .........badhai

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  2. शब्द जैसे ढ़ल गये हों खुद बखुद, इस तरह कविता रची है आपने।

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  3. पहली बार पढ़ रहा हूँ आपको और भविष्य में भी पढना चाहूँगा ......शुभकामनायें

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  4. बहुत ही सटीक लिखा है आपने...

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labon ko thirakane do jara...