ये वक़्त गुजर जायेगा एक दिन ,
तू देखता रह जायेगा ..
आज खुश है तू अपने कर्मों से ,
कल शायद इनसे तू रो जायेगा ,
खुद को बचाले बुरे कर्मों से ,
वरना तू मर मर के जी पायेगा .
बुलंदियों पर है आज तू ,
तो क्या कल बुलंद रह पायेगा .
खुद को ही आज समझले तू ,
वरना फिर संभल न पायेगा .
जब गरीबी तुझे उदास करे ,
या बेशुमार दौलत तेरे हाथ भरे ,
मत मुस्कुरा , न निराश हो ,
सब कुछ वेवफा हो जायेगा .
क्या बनाकर "ताज ", कारीगर आज जिन्दा हैं ,
या पिरामिड की मिटटी कोई अमृत का पुलिंदा है ,
पिरामिड हो या इंसान हो ,
कोई न ठहर पायेगा .
तेरे दिल की तस्वीर मुस्कराहट से बनेगी ,
तेरी रात मुस्कुराते संगीत से सजेगी ,
खुद को इतना व्यस्त कर लेना तू ,
दुखी होने के लिए समय खो जायेगा .
ये वक़्त गुजर जायेगा एक दिन ,
तू देखता रह जायेगा ..
bahut sundar.bahut sundar.
ReplyDeleteAryan Ji bahut sunder rachna. bahut gehri paith ker gayi hai aapki ye bhavook rachna .........badhai
ReplyDeleteशब्द जैसे ढ़ल गये हों खुद बखुद, इस तरह कविता रची है आपने।
ReplyDeleteपहली बार पढ़ रहा हूँ आपको और भविष्य में भी पढना चाहूँगा ......शुभकामनायें
ReplyDeleteबहुत ही सटीक लिखा है आपने...
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